50 दिन के बाद मां से मिला…मासूम तो रो पड़ा,क्या था कारण

50 दिन के बाद मां से मिला…मासूम तो रो पड़ा,क्या था कारण

मध्यप्रदेश। डेढ़ महीने पहले रतलाम के पास जिस 6 साल के मासूम आकाश के हाथ-पैर ट्रेन से कट गए थे, आखिरकार उसके परिजनों का पता चल गया है। रविवार शाम को उसकी मां, दादी और अन्य रिश्तेदार खरगोन से एमवाय अस्पताल पहुंचे। पुलिसकर्मी चेतन नरवले ने जैसे ही आकाश को उसकी मां को दिखाया तो दोनों एक-दूसरे को सिर्फ देखते रहे और फिर बेटा रोने लगा। बेटे से मिलने के बाद उसकी मां और रिश्तेदार सोमवार सुबह अपने गांव सांगवी खरगोन के लिए रवाना हो गए। प्रशासन औपचारिकता पूरी करने के बाद ही बच्चा उन्हें सौंपेगा।

मां की गोद से नीचे गिर गया था…
आकाश के पिता बीमार होने के कारण इंदौर नहीं आ सके। मां तो कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है कि आकाश किन परिस्थितियों में दुर्घटना का शिकार हुआ था, जबकि रिश्तेदारों ने बताया कि वह गोद में से गिर गया था। इसके बाद दंपती मजदूरी करने गुजरात चले गए थे। मां भले मिल गई पर उन्होंने आकाश का पता क्यों नहीं लगाया, उसकी गुमशुदगी क्यों दर्ज नहीं कराई, जैसे कई सवाल अभी अनसुलझे हैं।

खाली हाथ लौट गई मां और परिजन
आकाश की मां के पास बेटे का आधार कार्ड भी नहीं था और दूसरी बात यह भी है कि उसके पिता भी इंदौर नहीं आ पाए थे l नजदीकी लोगों ने बताया कि परिवार इतना गरीब है कि वह दो जून की रोटी ही बड़ी मुश्किल से जुटा पाता हैl यही कारण है कि वह हादसे के बाद गुजरात मजदूरी करने चले गए थे।

आकाश के इंदौर से जाने की बात सुनकर अस्पताल की महिला कर्मचारी की आंखें भर आई। मासूम भी रोने लगा। हालांकि वह अभी दो महीने अस्पताल में ही रहेगा।

बच्चे को ठीक होने में लगेंगे दो महीने

रेलवे एसपी निवेदिता गुप्ता ने बताया कि अभी बच्चे को ठीक होने में दो महीने लगेंगे। इसके साथ ही उसके कृत्रिम अंगों के लिए भी जयपुर में बात की जा रही है। जहां तक बच्चे का सवाल है उसे चाइल्ड लाइन को सौंपा जाएगा। उसके बाद वहीं से उसे परिजन को सौंपने की आगे की दिशा तय होगी l

पुष्टि होने के बाद ही आकाश को उसकी मां रेशमा को सौंपा जा सकेगा। वरिष्ठ अधिकारी मामले की तहकीकात कर रहे हैं। अभी बच्चा सरकार के पास है। पूरी विधिवत कार्यवाही, पहचान के दस्तावेज, जांचें आदि कराने तथा पुष्टि होने के बाद उन्हें बच्चा मिल सकेगा।

आकाश के इंदौर से जाने की बात सुनकर अस्पताल की महिला कर्मचारी की आंखें भर आई। मासूम भी रोने लगा। हालांकि वह अभी दो महीने अस्पताल में ही रहेगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों और फोटो से रिश्तेदार ने पहचाना

दरअसल, आकाश की मां रेशमा और पिता भीम खरगोन के सांगवी के रहने वाले हैं। वे मजदूरी करते हैं। उनका दूसरा बेटा राज एक साल का है। उनके इंदौर आए रिश्तेदार तैर सिंह व ग्रामीण कैलाश ने पुष्टि की कि आकाश भीम-रेशमा का बेटा है। तैर सिंह (सांगवी) ने बताया कि शनिवार को उसने सोशल मीडिया पर आकाश का वीडियो देखा तो उसे पहचान लिया। यह बात उसने आकाश के माता-पिता को बताई। इसके बाद रविवार को मां रेशमा, दादी व अन्य रिश्तेदार इंदौर पहुंचे। आकाश मां रेशमा को देखते ही रोने लगा।

डेढ़ माह में पिता-पुत्र जैसा रिश्ता... । पुलिसकर्मी चेतन नरवले के साथ भोजन करता आकाश।

डेढ़ माह में पिता-पुत्र जैसा रिश्ता… । पुलिसकर्मी चेतन नरवले के साथ भोजन करता आकाश।

पुलिसकर्मी चेतन नरवले ने आकाश की मां से कई सवाल किए। मां रेशमा ने कोई जवाब नहीं दिया तो चेतन रो पड़े और कहा यह मेरा बेटा है। डेढ़ महीने से हरदम हमारे साथ है। वह हमसे घुल मिल गया है। वह मुझे ही अब पिता समझता है। उधर, स्टाफ व पुलिसकर्मी के लाड-प्यार से आकाश की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। उसे क्रिकेट का शौक तो है ही, अब भोजन भी काफी चाव से करता है। पुलिसकर्मी चेतन ने उसे कई नई ड्रेसें दिलाई। रविवार को उसे नई ड्रेस पहनाई गई। शाम को चेतन भोजन करने नीचे जाने लगे तो उसने भी साथ में चलने की जिद की तो वे उसे साथ ले गए, वहां उसने कुर्सी पर बैठकर अपने हाथ से भोजन किया तो वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आई।

6 साल का मासूम अस्पताल में कराहता है तो पूरा वार्ड रो पड़ता है

इंदौर के महाराजा यशवंत राव हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल का एक वार्ड। यहां कई मरीज भर्ती हैं, लेकिन यहां 7 दिन से भर्ती 6 साल के बच्चे की हालत और कराह से हर कोई सहम उठता है। आंसू फूट पड़ते हैं। कुछ पल के लिए अपनी तकलीफ भूलकर प्रार्थना करने लगते हैं कि ‘हे भगवान! इस ‘बिन मां-बाप’ के मासूम का दर्द कब खत्म होगा?’

3 मार्च को रतलाम के पास यह बच्चा रेलवे ट्रैक पर खून में लथपथ मिला था। एक पैर और एक हाथ कट कर धड़ से अलग हो गए हैं। दूसरा हाथ और दूसरा पैर भी बुरी तरह कुचले हुए हैं। दो सर्जरी के बाद जान बच गई, लेकिन ये बच्चा आखिर कौन है? कहां से आया? 7 दिन बाद भी किसी को नहीं पता। उसकी टूटी-फूटी बातों से पता चला है कि वो आदिवासी वर्ग से है। अब अस्पताल स्टाफ, जीआरपी और भर्ती मरीजों के अटैंडर वार्ड में उसे पाल-संभाल रहे हैं। यही उसके तीमारदार हैं।

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