बस्तर में नक्सल प्रभावित इलाखो में आम बच्चों समेत पहाड़ी और वनांचलों के बच्चों को शि‍क्षा देने का बनेगा अलग-अलग माड्यूल

बस्तर में नक्सल प्रभावित इलाखो में आम बच्चों समेत पहाड़ी और वनांचलों के बच्चों को शि‍क्षा देने का बनेगा अलग-अलग माड्यूल

छत्तीसगढ़ सरकार शि‍क्षा के माध्यम से समस्याओं को निजात दिलाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। प्रदेश में नक्सल प्रभावित बच्चों से लेकर वनांचलों में पठन-पाठन के कार्य को आसान करने के लिए शि‍क्षकों को विश्ोष प्रशि‍क्षण देने की तैयारी है। शि‍क्षकों को न केवल शि‍क्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रशि‍क्षण दिया जाएगा, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए काबिल बनाने का भी प्रशि‍क्षण दिया जा सकेगा।इसके अलावा शि‍क्षकों को एक बेहतर अभिभावक बनने का भी प्रशि‍क्षण मिलेगा इसके लिए प्रशि‍क्षण माड्यूल तैयार किए जा रहे हैं। अभी राज्य स्तर के प्रशि‍क्षण संस्थान केवल राज्य स्तर की नीति के आधार पर अनुसंधान एवं प्रशि‍क्षण करते हैं। जबकि राष्ट्रीय स्तर के प्रशि‍क्षण संस्थान होने से राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय माध्यमिक शि‍क्षा बोर्ड, राष्ट्रीय श्ौक्षिक अनुसंधान एवं प्रशि‍क्षण संस्थान की नीति के अनुसार काम होगा।

राष्ट्रीय शि‍क्षा नीति के अनुरूप अपग्रेड होंगे शि‍क्षक

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों को पठन-पाठन कार्य के लिए अनुकूल बनाने के लिए प्रशासनिक अकादमी की तरह शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान खोला जाएगा। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए बजट में फिलहाल एक करोड़ का प्राविधान किया है। नवा रायपुर में इसके लिए जल्द ही भवन बनेगा।

प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों में बच्चे अलग-अलग बोली-भाषा जानते हैं। इसके अनुसार शि‍क्षकों को प्रशि‍क्षण नहीं मिल पाता है इसलिए राष्ट्रीय स्तर के प्रशि‍क्षण संस्थान की जरूरत महसूस हो रही है। खासकर नक्सल प्रभावित इलाकों में बच्चों को अपने मां-बाप से दूर रहकर हास्टलों में पढ़ाई करने की मजबूरी है ऐसे में इन बच्चों को शि‍क्षक अभिभावक की तरह कैसे संभालें इसका भी प्रशि‍क्षण मिलेगा।

शि‍क्षकों का तैयार हो चुका है रिपोर्ट कार्ड

स्कूल शि‍क्षा विभाग ने शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार किया है। इसी के आधार पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से कराए गए शिक्षकों के स्व-मूल्यांकन के बाद शिक्षकों के रिपोर्ट कार्ड में 50 प्रतिशत शिक्षकों ने खुद को उत्कृष्ट बताया है। बाकी शिक्षकों ने खुद को अपेक्षाकृत कमजोर माना है और प्रशिक्षण की आवश्यकता को महसूस की है। 18 प्रतिशत शिक्षक खुद को तीसरे स्तर पर बहुत अच्छा बताया है। 13 प्रतिशत शिक्षक खुद को चौथे स्तर पर अच्छा बताया है।

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