पहले पत्थर से कुचला सिर, फिर जला दिया,पैरी नदी किनारे पुलिस को मिली अधजली लाश जानिए पूरी कहानी …

पहले पत्थर से कुचला सिर, फिर जला दिया,पैरी नदी किनारे पुलिस को मिली अधजली लाश जानिए पूरी कहानी …

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक अज्ञात लोगों ने 50 साल के अधेड़ की हत्या करके उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए शव को जला दिया, लेकिन लाश पूरी तरह जली नहीं। राहगीरों को जब इसकी जानकारी मिली तो अधजली लाश मिलने की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया है। मामला जिले के करेली बड़ी चौकी क्षेत्र का है।

जानकारी के मुताबिक, नवागांव में लोमश ऋषि आश्रम के पास पैरी नदी के एनीकेट के किनारे अधजली लाश पड़ी थी। बुधवार को इलाके के कुछ लोग नदी किनारे गए थे। जिन्होंने अधजली लाश देखी। जिसके बाद इसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे जवानों के साथ फॉरेंसिक टीम भी पहुंची थी। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में शव की पहचान बसंत कुमार साहू (50) के रूप में की है। जो राजधानी रायपुर का रहने वाला था।

SDOP कृष्ण कुमार पटेल ने बताया कि, जिन लोगों ने वारदात को अंजाम दिया है, उनका अब तक पता नहीं चला है, लगातार उनकी तलाश की जा रही है। बताया जा रहा है कि,किसी अन्य जगह पर उसकी हत्या की गई। और फिर अधेड़ की पहचान छिपाने के लिए उसे नदी किनारे लाकर जलाने का प्रयास किया गया था।

बिलासपुर में महिला को जिंदा जलाया था

कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में महिला को जिंदा जलाने का मामला भी सामने आया था। बुरी तरह से झुलसी महिला रेलवे ट्रैक के पास दर्द से कराह रही थी। तब लोगों ने उसकी आवाज सुनकर पुलिस को घटना की जानकारी दी थी। महिला को गंभीर हालत में इलाज के लिए सिम्स में भर्ती कराया गया था। हालांकि, आरोपियों तक पुलिस पहुंचने में नाकाम रही है।

दहेज के लिए युवक ने पत्नी को जिंदा जलाया

करीब 2 महीने पहले छत्तीसगढ़ से लगे मध्य प्रदेश के अनूपपुर में एक युवक ने अपनी पत्नी को जिंदा जला दिया था। जिसके बाद महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में भर्ती कराया गया था। जहां से गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर किया गया था। महिला की शादी GPM जिले के युवक से करीब 4 महीने पहले हुई थी। आरोप है कि, युवक का किसी और महिला के साथ अफेयर था। इसलिए अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने के लिए युवक उसे मायके छोड़ने के लिए घर से लेकर गया। फिर हाईवे के किनारे ले जाकर आग लगा दिया था।

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अपनी भावनाओं, दुख और खुशी को व्यक्त करने का सबसे सरल और सशक्त माध्यम हमारी मातृभाषा होती है- डेका

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