नई शिक्षा नीति को लेकर छत्तीसगढ़ी ले रही बैठक,जानिए क्या हुआ

नई शिक्षा नीति को लेकर छत्तीसगढ़ी ले रही बैठक,जानिए क्या हुआ

छत्तीसगढ़। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के अलावा राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों का क्रेडिट बैंक नहीं बनाया है। इसकी वजह से नई शिक्षा नीति के तहत इस बार राज्य के 8 स्वशासी महाविद्यालयों में पढ़ रहे विद्यार्थियों का न तो क्रेडिट बैंक बन पाया है और न ही उनके नंबर ट्रांसफर हो पा रहे हैं। इसकी वजह से नई शिक्षा नीति के तहत एक साथ अलग-अलग विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बीच में कोई विद्यार्थी अपनी पढ़ाई से गेप लेता है तो उसके रिकार्ड सुरक्षित रखने की कोई विधि नहीं है।

इसके अलावा नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में देश के अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ काफी पीछे चल रहा है। इस बात को लेकर उच्च शिक्षा संचालक शारदा वर्मा ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों, परीक्षा नियंत्रकों, स्वशासी महाविद्यालयों के प्राचार्यों और उनके सहयोगियों की क्लास ली। साथ ही उन्हें नई शिक्षा नीति के तहत सभी विद्यार्थियों का क्रेडिट बैंक बनाने, उसे डिजिलॉकर बनाकर रखने का काम शुरू करने के निर्देश दिए।

डॉ. शुक्ल ने कहा- नई शिक्षा नीति में छात्रों को मिलेगी पढ़ने की आजादी
साईं कॉलेज सेक्टर-6 में नई शिक्षा नीति -20202 पर हुए कार्यक्रम में मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के ओएसडी डॉ. धीरेंद्र शुक्ल ने कहा कि नई शिक्षा नीति दो साल से चल रही है। इसमें छात्रों को पढ़ने की आजादी है। अपने पसंद के विषयों को लेकर पढ़ सकते हैं। अपने कोर्स के अंतर्गत बीए, बीकॉम और बीएससी में भी तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इसका पैमाना भी तय किया गया है। इसके अनुसार उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री और उपाधि दी जाएगी। अंक सूची के स्थान पर विद्यार्थियों को ग्रेडिंग दी जाएगी। संस्था की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ममता सिंह ने कार्यक्रम के आखिरी में धन्यवाद ज्ञापन किया।

अब विद्यार्थी लिबरल डिग्री भी ले सकेंगे, यह 3 साल में मिलेगी
नई शिक्षा नीति के तहत दो अलग-अलग विषयों की पढ़ाई करने पर उन्हें उन्हीं विषयों में डिग्री दी जाएगी। लेकिन यदि कोई छात्र किसी एक विषय की स्पेशल पढ़ाई न करते हुए सभी विषयों को मिलाकर पढ़ता है तो तीन साल बाद उन्हें लिबरल डिग्री दी जा सकेगी। इसमें उनकी कोई विशेषज्ञता नहीं होगी, लेकिन उसे स्नातक की उपाधि दी जा सकती है। इन्ही सभी विषयों पर कार्यशाला में चर्चा की गई। साथ ही नए शिक्षा सत्र से उसकी इसकी शुरुआत करने पर जोर दिया गया। इसके लिए अभी से सारी तैयारी करने को कहा गया है।

साइंस कॉलेज में नए शिक्षा सत्र से डिप्लोमा इन फोकल आर्ट, प्रशिक्षण शिविर लगाया गया
साइंस कॉलेज में शिक्षा सत्र 2022-23 के दौरान स्किल डेवलपमेंट के तहत 6 अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। इसमें प्राचीन प्रतिमाओं का संरक्षण, मेटल वर्क, बांस की कलाकृतियां बनाना, रद्दी कागज से आकृतियां बनाने की मटरी कला समेत अन्य लोक कला का प्रशिक्षण कार्याशाला लगाई गई। कलाकृतियां बनाने के प्रायोगिक प्रशिक्षण के साथ-साथ उसके सैद्धांतिक नियम भी बताए गए। इसकी जानकारी उच्च शिक्षा संचालक को दी गई। उन्होंने इस पर नए सत्र से डिप्लोमा कोर्स शुरू करने के लिए कहा।

इसके आधार डिप्लोमा इन फोकल आर्ट का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। कार्याशाला में क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक दुर्ग संभाग डॉ. सुशील चंद्र तिवारी, ओएसडी डॉ. जीए घनश्याम, गुणवत्ता निश्चयन प्रकोष्ठ के संचालक डॉ. अनिल कुमार, गौरव खरे, रोहित सिंह और पूनम सिंह, सभी अकादमिक विवि के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक आदि मौजूद थे।

क्रेडिट बैंक से नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ने वाले छात्रों को होगी सुविधा
नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इससे सुविधा होगा। इसका सबसे बड़ा कारण है कि इसमें विद्यार्थी एक विवि से दूसरे विवि में पढ़ाई कर सकते हैं। एक साथ दो डिग्री कर सकते हैं। एक साथ विज्ञान, वाणिज्य और कला विषयों की भी पढ़ाई कर सकेंगे। बीच में किसी कारणवश पढ़ाई में ब्रेक ले सकते हैं और बाद में उसे पुन: शुरू कर सकते हैं, लेकिन क्रेडिट बैंक नहीं होने की वजह से इन सारी चीजों में दिक्कतें हो रही हैं। वहीं अन्य राज्य में इस पर बहुत तेजी से काम चल रहा है। पंजीकृत छात्रों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, लेकिन छत्तीसगढ़ में स्थिति बहुत कमजोर है।

7 साल तक रहेगा क्रेडिट नंबर मान्य, तैयारी भी शुरू
साइंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों का क्लास में बैठना, आंतरिक परीक्षाओं में शामिल होना, प्रयोगशाला में उनकी उपस्थिति और कार्य आदि के अलग-अलग नंबर होंगे। इसे ही क्रेडिट नंबर का नाम दिया गया है। जहां इन सारे क्रियाकलापों को एक साथ रखा जाना है उसे क्रेडिट बैंक नाम दिया गया है। इसमें रखे गए क्रेडिट अंक 7 साल तक मान्य रहेंगे। यानी कोई विद्यार्थी यदि शिक्षा सत्र 2023-24 में प्रवेश लेता है और एक साल पढ़कर पढ़ाई छोड़ देता है तो उसके अंक शिक्षा सत्र 2029-30 तक सुरक्षित रखे रहेगे। वह विद्यार्थी शिक्षा सत्र 2029-30 से पुन: पढ़ाई कर सकेंगे।

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