धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 सदन में पास: ‘अवैध धर्मांतरण पर सख्त वार’, डिप्टी CM का विपक्ष पर हमला, CM बोले—ऐतिहासिक क्षण

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 सदन में पास: ‘अवैध धर्मांतरण पर सख्त वार’, डिप्टी CM का विपक्ष पर हमला, CM बोले—ऐतिहासिक क्षण

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 चर्चा के बाद पारित हो गया। 6 अध्याय और 31 प्रावधानों वाले इस विधेयक को सरकार ने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए बड़ा कदम बताया है। पहले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष के बहिष्कार पर तीखा हमला बोला और कानून की जरूरत बताई, इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक क्षण करार दिया।

डिप्टी CM का हमला—‘वॉकआउट नहीं, कांग्रेस का पलायन’

सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस के बहिष्कार को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह वॉकआउट नहीं बल्कि पलायन है, क्योंकि कांग्रेस इस विषय पर चर्चा से बचती है। शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के कारण ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती और हमेशा चर्चा से भागती रही है।

‘1968 कानून का विस्तार, अब और सख्त प्रावधान’

विजय शर्मा ने कहा कि 1968 में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए कानून को ही अब वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार विस्तारित किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले का कानून कमजोर था, जिसका फायदा उठाकर अवैध धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ीं। नया कानून अधिक स्पष्ट और कड़ा है, जिससे ऐसी गतिविधियों पर रोक लगेगी।

‘धर्मांतरण ने पैदा किया वर्ग संघर्ष’, नक्सलवाद से भी बड़ी चुनौती

गृहमंत्री शर्मा ने कहा कि माओवादी भी बस्तर में वैसा वर्ग संघर्ष खड़ा नहीं कर सके, जैसा धर्मांतरण के कारण उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने इसे नक्सलवाद से भी बड़ी सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए कड़े कानून की जरूरत थी।

बस्तर में धर्मांतरण पर कोई आधिकारिक सूचना नहीं, सरकार ने उठाए सवाल

शर्मा ने बताया कि 2004 से 2021 के बीच कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और सुकमा जैसे जिलों में धर्मांतरण को लेकर प्रशासन को एक भी आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर धर्मांतरण के मामले सामने आते रहे, जिससे पारदर्शिता और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

‘संविधान में स्वतंत्रता, लेकिन पब्लिक ऑर्डर सर्वोपरि’

डिप्टी CM ने कहा कि संविधान धर्म की स्वतंत्रता देता है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था उससे ऊपर है। राज्य सरकार को पब्लिक ऑर्डर बनाए रखने के लिए कानून बनाने का अधिकार है और यह विधेयक उसी दिशा में एक जरूरी कदम है।

‘धर्मांतरण पर अब जीरो टॉलरेंस’, सख्त कार्रवाई की चेतावनी

विजय शर्मा ने कहा कि अब किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या छल से धर्म परिवर्तन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन किए बिना किए गए धर्मांतरण को अवैध माना जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

CM साय बोले—‘ऐतिहासिक क्षण, आस्था और संस्कृति की रक्षा’

इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधेयक के पारित होने को प्रदेश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए निर्णायक कदम है और इससे सामाजिक संतुलन और समरसता मजबूत होगी।

‘प्रलोभन और दबाव से धर्मांतरण पर लगेगी रोक’

मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से गरीबी, अशिक्षा और अज्ञानता का फायदा उठाकर धर्मांतरण की घटनाएं होती रही हैं। इस नए कानून के जरिए ऐसी अवैध और अनैतिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी।

नए कानून में अनिवार्य सूचना और जांच की व्यवस्था

सीएम साय ने बताया कि अब धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति और कराने वाले दोनों को अधिकृत अधिकारी को सूचना देना अनिवार्य होगा। आवेदन सार्वजनिक किया जाएगा और एक माह के भीतर जांच के बाद ही अनुमति दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी प्रकार का दबाव या प्रलोभन शामिल न हो।

कड़े दंड और कारावास, अवैध गतिविधियों पर लगेगा अंकुश

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1968 का कानून अपेक्षाकृत कमजोर था, लेकिन अब नए कानून में कड़े दंड और कारावास का प्रावधान किया गया है। इससे अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण होगा और सामाजिक शांति बनी रहेगी।

आदिवासी संस्कृति की रक्षा, जूदेव को किया नमन

सीएम साय ने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए कहा कि उनका धर्मांतरण विरोधी अभियान आज भी प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि यह कानून आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नवरात्रि और नववर्ष पर कानून पास, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर इस विधेयक का पारित होना गौरव की बात है। उन्होंने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि यह कानून छत्तीसगढ़ को और अधिक समरस, शांतिपूर्ण और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर: मुख्यमंत्री साय

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर: मुख्यमंत्री साय

रायपुर। मुख्यमंत्री साय से विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधि...