हथियार छोड़ थामा हुनर का हाथ : अन्नुलाल बना आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता की मिसाल

हथियार छोड़ थामा हुनर का हाथ : अन्नुलाल बना आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार की माओवादी आत्मसमर्पण पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 अब राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और उम्मीद की नई रोशनी बन रही है। इसी नीति से प्रेरित होकर नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के सोनपुर गांव निवासी अन्नुलाल भंडारी ने नक्सलवाद का रास्ता छोड़ मुख्यधारा की ओर एक प्रेरक कदम बढ़ाया है।

कभी बंदूक थामने को मजबूर हुए अन्नुलाल ने लगभग 20 वर्षों तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहते हुए गुरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण प्राप्त किया और संगठन के लिए प्रचार, सुरक्षा और रसद जैसे कार्यों को अंजाम दिया। लेकिन 2017 में उन्होंने हिंसा का जीवन छोड़ने का निर्णय लिया और सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर एक नई शुरुआत की।

पुनर्वास के बाद अन्नुलाल ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती शुरू की और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़े। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी। नारायणपुर के लाइवलीहुड कॉलेज में उन्होंने जल वितरक संचालक (प्लम्बर) का प्रशिक्षण प्राप्त करना शुरू किया, जिससे उन्हें तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ कई जनकल्याणकारी योजनाओं — जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और किसान क्रेडिट कार्ड — का लाभ भी मिलने लगा।

अन्नुलाल का अगला कदम अब ग्राम पंचायत सोनपुर में जल वितरक के रूप में कार्य करना है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि वे समाज में सम्मानपूर्वक और भयमुक्त जीवन जी सकेंगे। अन्नुलाल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “अब मैं स्वतंत्रता पूर्वक जी पा रहा हूँ, यह मेरी नई जिंदगी है।”

छत्तीसगढ़ सरकार की यह नीति और योजनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि बदलाव संभव है, बशर्ते सही अवसर और मजबूत हौसला हो। अन्नुलाल की यह कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो अब बंदूक नहीं, हुनर और विकास के रास्ते को चुनना चाहते हैं।

एक बंदूक छोड़, सौ सपने जिए जा सकते हैं — बस जरूरत है एक नए विश्वास की।

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