रायपुर,छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जल संरक्षण को लेकर शुरू की गई योजनाएं अब जन आंदोलन का रूप ले चुकी हैं। राज्य के मुंगेली और सरगुजा जिले इस दिशा में उदाहरण बनकर उभरे हैं, जहां सरकार की पहल, तकनीकी नवाचार और जनभागीदारी के समन्वय से भूजल संरक्षण और सतत आजीविका की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

मुंगेली: ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान से गांवों को मिला जल का संबल
मुंगेली जिले में मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जल प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण और सामूहिक श्रमदान को लेकर अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।
- जिले में 265 अनुपयोगी बोरवेल की पहचान कर उन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है, जिनमें से 45 बोरवेल पहले ही कार्यशील हो चुके हैं।
- 276 रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा। लोरमी ब्लॉक में सर्वाधिक 132 रिचार्ज पिट चिन्हांकित किए गए हैं।
- 160 बोरी बांधों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें 146 का निर्माण पूर्ण हो चुका है — और यह सब ग्रामवासियों के श्रमदान से संभव हुआ है।
इस जनसहभागिता से सिंचाई क्षमता, मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन और वर्मी कम्पोस्ट जैसी गतिविधियों को भी नया प्रोत्साहन मिल रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हो रही है।

सरगुजा: बोरवेल सैंड रिचार्ज फिल्टर से वर्षा जल को मिल रही नई दिशा
सरगुजा जिला प्रशासन द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बोरवेल सैंड रिचार्ज फिल्टर योजना की शुरुआत की गई है।
- इस तकनीकी नवाचार के तहत ड्राई बोरवेल में रेत, गिट्टी और चारकोल से बने फिल्टर लगाए जा रहे हैं जो वर्षा जल को छानकर सीधे भूजल में समाहित करते हैं।
- यह कार्य सभी शासकीय भवनों, स्कूलों, पंचायत परिसरों और सार्वजनिक स्थलों में किया जा रहा है।
इस योजना से न केवल भूजल स्रोतों का पुनर्भरण हो रहा है, बल्कि बोरवेल की आयु और दक्षता भी बढ़ रही है।
जल संरक्षण से जुड़े जन-जन
दोनों जिलों में ग्रामीण, पंचायती प्रतिनिधि, स्व-सहायता समूह और स्वयंसेवी संगठन योजना के योजना, निर्माण और निगरानी तक में सक्रिय रूप से सहभागी बन रहे हैं। अब यह पहल केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि हर गांव की अपनी मुहिम बन चुकी है।
